चीन की जनसंख्या का झूठ: क्या है सच्चाई और इसके पीछे का मकसद?
चीन की जनसंख्या का झूठ: क्या है सच्चाई और इसके पीछे का मकसद?
चीन दशकों से अपनी जनसंख्या को लेकर दुनिया को गुमराह करता रहा है। हाल ही में जनसंख्या से संबंधित असली डेटा लीक होने के बाद चीन की सरकार बौखलाई हुई है। सवाल उठता है कि आखिर चीन इस झूठ को बार-बार क्यों दोहराता रहा?
एक बच्चे की नीति और उसका उद्देश्य
25 सितंबर 1980 को चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति डें जियाओपिंग ने एक पत्र जारी कर देशभर में एक बच्चे की नीति का पालन करने का आह्वान किया। इसका उद्देश्य था जनसंख्या वृद्धि को रोकना। लेकिन समस्या यह थी कि सरकार के पास अपने देश की जनसंख्या का सही आंकड़ा ही नहीं था।
साल 1982 में चीन ने पहली बार बड़े पैमाने पर जनगणना का अभियान चलाया। इसके लिए अमेरिका से 21 कंप्यूटर खरीदे गए और हजारों लोगों को प्रशिक्षित किया गया। इसी साल अक्टूबर में यह घोषणा की गई कि चीन की जनसंख्या 1 अरब से अधिक हो चुकी है।
चीन का जनसंख्या डेटा: झूठ या सच्चाई?
1982 में चीन ने अपनी जनसंख्या 1 अरब बताई। इसके बाद 1992 में यह आंकड़ा 1.18 अरब हो गया। साल 2000 में 1.28 अरब और 2024 तक 1.42 अरब के आंकड़े पेश किए गए।
यहां सवाल उठता है कि यदि 1980 से 2016 तक एक बच्चे की नीति लागू रही, तो जनसंख्या में इतनी बढ़ोतरी कैसे हुई?
झूठे आंकड़ों के पीछे का मकसद
चीन ने जनसंख्या वृद्धि के झूठे आंकड़े दुनिया को दिखाकर यह साबित किया कि उसके पास मजदूरों और मानव संसाधनों की कमी नहीं है।
1979 में डें जियाओपिंग ने अमेरिका से दोस्ती कर विदेशी निवेश के दरवाजे खोले। सस्ते श्रमिकों का प्रचार कर चीन ने विदेशी कंपनियों को आकर्षित किया। नतीजतन, 1982 तक चीन का निर्यात 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 35 बिलियन डॉलर हो गया।
जनसंख्या का सच्चाई: बिग कंट्री विद द एम्प्टी नेस्ट
2007 में ई फू जियान की किताब "बिग कंट्री विद द एम्प्टी नेस्ट" ने चीन के झूठ का पर्दाफाश किया। इसमें बताया गया कि चीन की वास्तविक जनसंख्या 1.28 अरब के आसपास है और देश तेजी से बूढ़ा हो रहा है।
वर्तमान स्थिति और खतरे की घंटी
आज चीन दुनिया का सबसे वृद्ध जनसंख्या वाला देश बन गया है। 60 साल से ऊपर की आबादी कुल जनसंख्या का 20% हो गई है। जन्म दर में गिरावट से कामकाजी लोगों की संख्या घट रही है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
भारत के लिए सबक
चीन के जनसंख्या झूठ से भारत को सबक लेना चाहिए। जनसंख्या का सही उपयोग कर भारत मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में चीन को पीछे छोड़ सकता है। लेकिन अगर भारत ने भी चीन की तरह सख्त जनसंख्या नीति अपनाई, तो वह अपनी युवा कार्यशील आबादी के लाभ को खो सकता है।
निष्कर्ष
चीन के जनसंख्या वाले झूठ का गुब्बारा फूट चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन अपनी स्थिति को सुधारने के लिए आगे क्या कदम उठाएगा।
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